नई दिल्ली : न्यूजीलैंड की संसद में एक अभूतपूर्व घटना घटी जब ACT पार्टी की सांसद लॉरा मैक्ल्योर ने एक एआई द्वारा बनाई गई अपनी नग्न तस्वीर प्रदर्शित की। यह कदम उन्होंने संसद में गहरी चिंता जताने के लिए उठाया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग करके ग़लत और हानिकारक सामग्री बनाई जा सकती है।
क्या है मामला
14 मई 2025 को, लॉरा मैक्ल्योर ने संसद में एक A3 साइज़ की तस्वीर दिखाते हुए कहा, ‘यह मेरी नग्न तस्वीर है, लेकिन यह असली नहीं है’। उन्होंने बताया कि यह तस्वीर एक डीपफेक है, जिसे उन्होंने खुद कुछ ही मिनटों में इंटरनेट पर उपलब्ध टूल्स की मदद से बनाया। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि कैसे कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी की झूठी और अश्लील छवि बना सकता है।
डीपफेक का खतरा
मैक्ल्योर ने बताया कि डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग महिलाओं के खिलाफ तेजी से बढ़ रहा है। न्यूजीलैंड लॉ एसोसिएशन के अनुसार, 95 प्रतिशत ऑनलाइन डीपफेक वीडियो बिना सहमति के बनाए गए अश्लील वीडियो होते हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘पीड़ितों के लिए यह अपमानजनक और विनाशकारी है’।
कानून में बदलाव की मांग
मैक्ल्योर ने संसद में प्रस्ताव रखा कि न्यूजीलैंड में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को अपराध की श्रेणी में लाया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान कानून इस प्रकार की डिजिटल हिंसा को रोकने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें अपडेट करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या तकनीक में नहीं, बल्कि इसके दुरुपयोग में है।
अमेरिका की सांसद भी उठा चुकी है मामला
इससे पहले, अमेरिका की सांसद नैन्सी मेस ने भी एक सुनवाई के दौरान अपनी नग्न तस्वीर दिखाई थी, जो उनके पूर्व मंगेतर ने उनकी अनुमति के बिना ली थी। उन्होंने यह कदम वीडियो वॉयेरिज्म के खिलाफ सख्त कानूनों की मांग के लिए उठाया था।
तकनीकी दुरुपयोग के खिलाफ सख्त और प्रभावी कानून बनाने की मांग
लॉरा मैक्ल्योर का यह साहसिक कदम डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा और गोपनीयता के प्रति समाज और सरकार की जिम्मेदारी को उजागर करता है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब समय आ गया है, जब तकनीकी दुरुपयोग के खिलाफ सख्त और प्रभावी कानून बनाए जाएं।

